प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह-लेखक से एक परिचय-
डॉ रवीन्द्र प्रताप सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर हैं। हिन्दी और अंग्रेजी बाल साहित्य में वे चर्चित और सक्रिय हैं । फ़्ली मार्किट एंड अदर प्लेज़ (2014), इकोलॉग (2014) , व्हेन ब्रांचो फ्लाईज़ (2014), शेक्सपियर की सात रातें (2015) , अंतर्द्वंद (2016), चौदह फरवरी (2019) , चैन कहाँ अब नैन हमारे (2018) उनके प्रसिद्ध नाटक हैं , बंजारन द म्यूज (2008) , क्लाउड मून एंड अ लिटल गर्ल (2017) ,पथिक और प्रवाह (2016) , नीली आँखों वाली लड़की (2017), एडवेंचर्स ऑफ़ फनी एंड बना (2018),द वर्ल्ड ऑव मावी(2020), टू वायलेट फ्लावर्स(2020) उनके काव्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके लेखन एवं शिक्षण हेतु उन्हें स्वामी विवेकानंद यूथ अवार्ड लाइफ टाइम अचीवमेंट , शिक्षक श्री सम्मान ,मोहन राकेश पुरस्कार, भारतेन्दु हरिश्चंद्र पुरस्कार एस एम सिन्हा स्मृति अवार्ड जैसे सोलह पुरस्कार प्राप्त हैं ।
बाल साहित्य (नाटक)- पर्यावरण संरक्षण पर आधारित नाटक
‘हवा हमारी, नदी हमारी’-प्रो. रविन्द्र प्रताप सिंह

पात्र परिचय-
मुख्य पात्र-
- रोशन -मेढक
- टिटूजा-कछुआ
- बेकल – बगुला
प्रसंगमें आये पात्र
- मिली -मडस्किपर मछली
- बैलेंस -धोखेबाज़ बगुला
- कुंजर -केकड़ा
- मडस्किपर के बच्चे
दृश्य-
(रविवार दोपहर का समय। एक छोटी नदी , किनारा रेतीला नहीं है। नदी के किनारे कुछ हरे भरे पेड़ दिख रहे हैं , पेड़ों से पक्षियों की चहचहाहट सुनाई दे रही है । नदी में पानी का बहाव कम है। किनारे रेत नहीं ही , मिटटी नम है , कहीं कहीं कीचड़ सा है। बारिश बीते हुए दो महीने हो गए हैं , नदी में पानी कम हो रहा है। हलकी ठण्ड शुरू हो चुकी है , ऐसे में घूप बहुत अच्छी लग रही है। अचानक किनारे गाना गाता हुआ आता है एक मेढक ,इसका नाम रोशन है। )
नाटक मंचन-
रोशन– (गाते हुए )
पानी नीला, मोहक प्यारा
मौसम भी है नरम सुहाना ,
देखो कितने घूम रहे हैं -
कूद कूद कर फिसल रहे हैं ,
मडस्किपर की पूरी टोली
खेल रही कीचड़ से होली !
कितने सारे ,
कितने प्यारे ,
नन्हे बच्चे, प्यारे प्यारे !
(इतने में टिटूजा कछुआ पानी से निकल कर मेढक के पास पहुँचता है )
टिटूजा–
क्या -नन्हे बच्चे, प्यारे प्यारे !
इसमें आश्चर्य की क्या बात , क्या गाये जा रहे हो रोशन , बच्चे हैं तो प्यारे होंगे ही !
रोशन-
गाना क्या टिटूजा अंकल , यूँ ही , देखिये ,न .. . देख कर बड़ा अच्छा लगा , आप भी देखिये ,मडस्किपर मिली के बच्चे हैं , कितने खुश हैं , गा रहे हैं , नाच रहे हैं !
टिटूजा–
अरे रोशन , आजकल लगता है मोबाइल स्क्रीन पर बहुत लगे रह रहे हो, इसीलिये तुम्हारी आँखें कमज़ोर हो गयीं हैं , जरा ध्यान से देखो , मिली के बच्चे नहीं हैं वे !
रोशन–
वो मैं कब कहता हूँ कि मडस्किपर नहीं हैं , हैं मडस्किपर ही , पर मिली के बच्चे नहीं हैं , वे सब उधर हरे शैवाल में पिकनिक करने गए हैं। मुझे मिले थे …
(अचानक उड़ता हुआ आकर ,बेकल बगुला पास में बैठ जाता है )
बेकल–
नमस्ते टिटूजा जी , रोशन जी ! कैसे हैं आप लोग ?
रोशन–
बेकल नमस्ते! … अरे हाँ देखो किसी बच्चे को परेशान न करना भाई !
बेकल–
अरे नहीं , क्या कहते हैं आप रोशन भाई , बिलकुल नहीं , भूल गए आप हम सभी बगुले तो दोस्त हो गए हैं जल जीवों के !
टिटूजा–
हाँ हाँ मालूम है , तुम हमारे दोस्त यूँ ही नहीं हुये , मज़बूरी में बने हो…
बेकल–
(झेंपता हुआ )नहीं ऐसा नहीं है अंकल !
टिटूजा–
बताऊँ बेटा , याद है , जब पिछले साल सूखा पड़ा था , बैलेंस बगुला ढोंगी बन कर सूखे तालाब से सुरक्षित हरे भरे और पानी से भरे जलाशय पर पहुंचने का वादा करके ले जाता था , और रास्ते में उन बेचारी मछलियों को खा जाता… याद है !
बेकल–
जी ।
रोशन–
हाँ , बड़ा दुखद था , लेकिन हमारे कुंजर केकड़े ने सबक सिखला दिया बैलेंस को !
बेकल–
बैलेंस कि सोच बड़ी ख़राब थी , वह बहुत गन्दा बगुला था , तभी तो मारा गया , और हमारे वक- समुदाय को बदनाम कर गया … हम लोग वैसे नहीं हैं।
टिटूजा–
कोई बात नहीं , यूँ ही मज़ाक में समझो !… बेटा हम सभी जीव जंतु एक दूसरे के सहयोगी ही हैं। यह जल, वायु ,गगन धरती हम सबकी है , मिलकर रहना चाहिए हम सब को , एक दूसरे को कोई कष्ट न दें। आपस में सहयोगी बनें।
रोशन–
हाँ हाँ ठीक है भाई , हमने बस सतर्क कर दिया , बच्चे हैं हमारे पड़ोस के।
टिटूजा–
भाई सभी बच्चों को बताना चाहिए , सतर्क रह कर ही हम खुश रह सकते हैं। सतर्कता बहुत जरूरी है। ज्यादातर लोग हमारे दोस्त होते हैं लेकिन बेटा दुश्मन भी आस पास ही रहते हैं। कभी कभी तो हमारे आस पास के लोग भी हमें धोखा दे देते हैं ।
रोशन–
हाँ अंकल हम मडस्किपर के बच्चों को जरूर बताएँगे ये बात।
बेकल–
हम भी उन्हें बैलेंस कि कहानी सुनाएंगे… ठीक !
(सब जोर जोर से हँसते हैं। बेकल भी हँसता है )
टिटूजा–
चलते हैं , आओ रोशन बैठो मेरी पीठ पर , हम भी चलते हैं।
(तीनों चल देते हैं मडस्किपर के बच्चों की तरफ। तीनों गाते हैं -सामूहिक स्वर में -)
जल है जीवन हम सबका हवा हमारी नदी हमारी सब कुछ सबका हम सबका। मिले चलो हम बच्चों से भी उनको भी ये बात बतायें- जल है जीवन हम सबका सब कुछ सबका हम सबका !
पर्दा गिरता है