छत्तीसगढ़ी कहानी-थपरा
-चन्द्रहास साहू

छत्तीसगढ़ी कहानी थपरा
“गौटिया भइया अब तोरे आसरा हावय। दू कौरा कमती खा लेबो फेर कोट कछेरी ले हमला बचा ले मालिक।”
“सुरुज उवे के आगू थाना मा हाजरी देवाना हे कहिके तकादा मारके गे हावय साहब हा।”
गोदावरी अऊ गोसाइया ओरी पारी किहिस । अब दुनो हाथ जोड़के ठाड़े हावय।
गौटिया पेपर पढ़त हावय।
” घोड़वा के काल बेन्दरवा मा आगे दाऊ बचा ले हमन ला।”
“ले मेहा तियार होके आवत हावव । थाना अमरके अगोर लेबे ।”गौटिया किहिस ।
गौटिया अऊ सुरुज नरायेन ला पायलगी करिस। अपन सायकिल ला थाना के रस्दा मा मुरकाये लागिस जवनहा हा। कोरा मा नान्हे लइका डंडिल मा बड़का नोनी अऊ बाबू पीछू कोती झोला झांगड़ी ढोलक डुगडुगी रिंग डोरी बांस अऊ खाये जठाये के जम्मो जिनिस सायकिल मा हमागे। विश्वकर्मा जी ला घला अइसन कला नइ आवय जोन रिकम ले जवनहा जीवन हा जम्मो ला जोर के सायकल चलावत हावय।
लइका मन असकटाये लागिस बिहनिया ले थाना मा बइठे बइठे। सिपाही कभू मुचमुचाय कभू करू मुहु करे। चार बेरा पूछ डारिस साहब कब आही ।
“बस आवत हे …।” साढ़े दस बजे ले इही सुनत हावय। अब तो बर के छइयां मा उंघासी घला लागत हावय।
जीवन अऊ गोदावरी डंगचगहा आवय। किंजर किंजर के खेल देखाथे माई पिल्ला। आज सिलौटी गांव मा घला आये हावय।
“दाई दीदी भइया हो…..”
“नान्हे नान्हे लइका हो……”
“डोकरी डोकरा किसान मन…..”
“नांगर जोत्ता जवान मन…..”
ओरी पारी चिल्लाये दूनो परानी अऊ ढोलक डुगडुगी ले ताल देवय। ओलकी कोलकी सब कोती किंजर के हांका पार डारिस।
रंगबिरंगी फेर जादा लाल रंग के नानकुन कथरी अब सम्हेरा मा माड़े हावय अऊ एक ठन कथरी मा लाल लिंगोटी पहिरे बन्दन रंग के पिल्ली हावय । ताबीज कौड़ी रुद्राक्ष अऊ भोजपत्तर बिगरे हावय।
डडंग डडंग बाजा बाजे लागिस अऊ गोदावरी झुमरे लागिस ताल देवत। उच्चा राग मा गाना गावत रिहिस । छत्तीसगढ़ी नइ रिहिस न उड़िया हल्बी भतरी कस नइ लागे। अइसे लागे जइसे दु चार भाखा ला मिंझार के गावत हावय।फेर अर्थ समझ आइस कोनो राजा के बीरता अऊ माईलोगन के पीरा के गीत आवय। चौपाल मा सब सकलाये हावय।
मँझोत के कथरी मा सात बच्छर के बाबू आगे रिंग धरके । हाथ गोड़ नरी शरीर के अंग अंग ला ओमा बुलकाये लागिस हासत मुचकावत । अब नोनी घला आगे आठ बच्छर के। पहिली एकेझन बुलकिस रिंग मा अब टूरा संग।
देखइया लइकामन अब्बड़ हासिस जवनहा सियनहा मन घला। अऊ अब तो सब के जी धक्क ले लागेगे। दुनो भाई बहिनी संघरा बुलकत हावय अऊ अब…। सटक गे…। अरहझ गे ।
“बचा ले दाई बचा ले ददा “रोये लागिस दुनो कोई। महतारी मन के आँसू ढरकगे। लइका मन थपोली मारिस। ददा जीवन निकालिस इतरावत। बरत दीया ला माथ मा मड़ा के फेर बुलकिस। बॉस के कैची म डोरी बंधाये रिहिस अब रेंगे लागिस। ओखर गोड़ मा का चुम्बक लगे हावय परमात्मा जाने। एक एक गोड़ ऐसे उसालिस कि दुनिया नपागे । एक पग अगास, दूसर धरती अऊ तीसर पताल लोक , जइसे बिष्णु जी आवय। कनिहा के खाल्हे ला तो अऊ हलाथे तभो ले कुछु नइ होवत हे। ये पार ले ओ पार फुरफुन्दी कस उड़ात हावय। बुढ़वा जवान तो देखे हे अइसन खेल ला। फेर लइका मन के अचरज के ठिकाना नइ हावय।
अब जवनहा हा मैदान मा आगे । कथरी मा सुतिस अऊ बड़का पखरा लानके लदक दिस। गॉंव के जवनहा घला पंदोली दिस। डुगडुग डुगडुग डडंग डडंग बाजा बाजे लागिस बेटी बजावत हावय। गोदावरी घन ला धरके महाबीर के जय बोलाइस । ये दाई जवनहा चिखिस अऊ पथरा कुटका कुटका होगे। अब सबसे खतरनाक स्टंट करत हावय । कोनो झन अजमाहू भैया हो । चार अन्नी रॉड ला नरी ले मोड़े के उदिम करत हावय। देखइया मन व्याकुल हावय । ऊँचनीच होही ते मर जाही…? कतको झन मन तो शर्त लग गे बीस रुपिया मा । नहीं ते दारू के शीशी बर।
“ये कोई बड़ी बात नही है मैं भी कर सकता हूँ बल्कि इससे भी मोटा रॉड को मोड़ सकता हूँ। ” ताव देखावत ठाढ़े होगे एक झन जवनहा हा। जम्मो कोई कलर कलर करिस । दाऊ हा अंगरी मा ढ़केलिस ओतकी मा गिरगे।
“दिस इस चिटिंग.. आई नो दैट… “अब अंग्रेजी मा बड़बड़ावत हावय। बिना पिये ढंग के छत्तीसगढ़ी नइ बोल सके ते …पीये के पाछू हिंदी अऊ अंग्रेजी मारथे । कोन जन बॉटल मा का जादू हावय ते…?
डंगचगहा जीवन अब रॉड ला मोड़ डारिस जइसे बेसरम के सुन्टी आवय। महाबीर के जय बोलाइस अब बाजा बाजिस अऊ सुघ्घर गाना गाये लागिस अऊ चाउर दार ला झोंके लागिस। आधा बस्ती सकलाये रिहिस फेर दार चाउर पइसा गोदावरी संसो करत हावय…।
अतका खतरनाक खेल काबर देखाथो गा भइया?
पापी पेट बर करथन भइया जब तक पसिया लिखाये हावय तब तक करबो ताहन तो कोन जन…. कोनो देखइया रही धुन नंदा जाही ते..? जवनहा संसो करत किहिस।
रात कन अलवा जलवा जेवन बनाइस। लइका मन ला खवाइस अऊ गोड़ हाथ के मालिस करिस बाबू के। जवनहा अपन बेवस्था मा लगे हावय । गिलास निकालिस सरकारी रस ला ढ़ारिस अऊ थोकिन पाछु पटियागे।
गोदावरी अऊ बड़का नोनी बरतन मांजत हावय।
गली अंधियार तभो ले जागत रहिथे ओहा। रखवार बरोबर कालू कुकुर आवय। छइयां दिखिस अऊ कुई कुई करत भुइँया मा घोण्डे लागिस। छइयां अब मइनखे बनगे । खटर खटर सायकिल बाजिस अऊ…कुकुर के भूकई। मइनखे दउड़े लागिस जेती रस्दा मिल जावय। अऊ…ये का..? गोदावरी उप्पर आ के झपागे । धोये बरतन मा गिरगे।
गोदावरी अकबकागे।
गोदावरी डर्रागे । महाबीर के नाव सुमरत किहिस
“अई कइसे करथस गा..?” उठ ना गोदावरी चेचकारे लागिस।
“उई हु हु ….” किहिस मंदहा हा अऊ फेर लठरे लागिस। जीवन ला उठाइस वहु हा तो सरकारी दुकान के पौवा मारके सुते हावय। नइ जागिस।
“रोगहा सोज बाय अपन रस्दा मा नइ जास। हमर धोवल बरतन ला अऊ मइला डारेस। होश नइ सम्हाल सकस तब काबर अतका पीथो। कलेचुप पी अऊ घर मा सूत जातेस। मोर गोसाइया हा सूते हावय तइसे गोदावरी के मुहु करू होंगे गोसाइया ला देखके।
“एकरा हमर फाँसी करे बर आ गेस।” एक बाल्टी पानी ला रिकोवत किहिस।
आरो ला सुनके पारा परोस के मन सकेलागे ।
“ये डंगचगहिन तुहर जात हा अइसनेच होथे रे छिनार हो पी खा के लड़ई झगरा मतावत हो।”
“कहाँ ले आगे येमन गांव बिगाड़े बर भगाओ येमन ला।”
“अपन दुनो के झगरा अऊ हमर उसनिन्दा होवत हावय।”
“कोंन जन एखरे घरवाला आय कि आने ला पोटार लेहे ते घुमक्कड़ जात के का ठिकाना…?
आनी बानी के गोठियाये लागिस पारा के मन।
“मेहाँ कही नइ करे हव भइया हो मेहाँ कही नइ करे हव बहिनी हो…। कोन जन कोंन आय ते ?
बड़का सियान किहिस “कोन आय येहां ?” येला तो चिन्हों । टार्च बारिस अऊ देखिस परोसी गांव तर्रागोंदी के कोचिया आय। बइला कोचिया।
अब सुध आये लागिस लड़बिड लड़बिड करत उठिस अऊ ठाड़े होंगे। अब तो सौहत अरहज गे हावय कोचिया हा ।
“गाय बछरू बेचके अपन धरम ला बेच डारेस अऊ अब डंगचगहिन बर नियत गड़ियाथस” गॉव के सियान हा खिसियाये लागिस।
आज तो डंगचगहिन के हाथ ले मार खाना तय हावय। जेखर तुतारी तिही ला कोचक । बइला बाजार के सुरता आगे। कतकोन बेरा अइसन संकट ले उबरे हावय। बड़का अनभवी घला हरे। माहौल ला परखिस हवा के दिशा ला टमरीस अऊ किहिस-
“ये मोटियारी डंगचगहिन हा मोला बलाए रिहिस। पइसा के लालच बर ।” मंद भभका छोड़त रिहिस।
“रोगहा ,दोखहा, मेहा तोला जानो न पहिचानो अऊ मोर ऊपर दोख लगाथस गोदावरी अगियाये लागिस।
” अपन परोसी कोचिया उप्पर भरोसा नइ हावय अऊ चार दुवारी मा बइठइया किंजरइया ऊपर भरोसा करत हावव ।” कोचिया अब रामबाण चला दिस। अब सब थू थू करे लागिस गोदावरी ला।
“येला भगाओ छिनार ला, हमर गांव नीति नियाव के गांव आवय । अइसन माईलोगन हा गॉव ला बिगाड़ दिही। मारो मारो …। भीड़ बाढ़गे । मारो मारो के आरो आये लागिस । अब तो अकेल्ला होगे गोदावरी हा । जीवन के नशा उतरिस अऊ उठगे । देखिस । चकरागे। का होवत हावय ? का भीड़ लगाए हावव ?
“तोर घरवाली ला पूछ ना रे नकटा “
माइलोगिन किहिस ।
मोर गोदावरी अइसन नइ करे ये सब ओ कोचिया के करस्तानी आवय । जीवन अब गोसाइन के सरोटा तीरे लागिस। जवनहा मन संग जोमें लागिस । अब तो गांव भर सकेलागे। अतका तो ओखर खेल देखे ला नइ आये रिहिस जतका अभिन आये हावय। अब तो पुलिस घला आगे रिहिस डग्गा धरके कोन जन कोंन फोन करिस ते…?
“साला यहाँ आकर जिस्म फ़रोसी का धंधा करते हो। बेत का डंडा चूतड़ में पड़ेगा तब समझ आएगा तुमको। राय… राय… बेत के डंडा बरसे लागिस । बड़का पुलिस वाला आय।
“बचाले कका ददा मोर गोसाइया ला। झन मार साहब मोर गोसाइया ला “।
झन मार मोर बाबू ला…। गोदावरी अऊ नोनी रोये लागिस। “ले चलो इन लोगो को डग्गा में बैठाकर सिपाही ला आदेश दिस। “
“मोर कोनो गलती नइ हावय साहब ओ कोचिया के हावय।
“कहाँ है कोचिया उसको भी पकड़ो । भीड़ मा देखे लागिस। वो तो भगा गे रिहिस । कहां मिलही….? फेर गुर्राइस इंस्पेक्टर हा।
“हाथी जंगल भगा गे अऊ पाव के चिन्हा बर ,गॉव गवतरी मा गदर मचाये हव। गौटिया आवय।” इंस्पेक्टर ला जोहार करत किहिस।
“तुहरे इहाँ के कंप्लेन रिहिस दाऊ उही ला निपटाये बर आये हंव। दू कौड़ी के डंगचगहिन जिस्म फ़रोसी के धंधा करथे । वो भी मेरे क्षेत्र में, आपके गॉव में …।
“अरे अभी हमर गॉव अतका नइ मइलाय हावय कि कोनो माईलोगिन जिस्म के धंधा करे। हाँ बबा जात के नियत भले डोल जाथे… ईमान डोल जाथे। अऊ …ओ कोचिया ला जानथव कतका चिरई मारे हावय तेन ला । कतका बेरा कोट कछेरी ले बाचे हावय तौन ला…।
वइसे ये जीवन अऊ गोदावरी ला घला जानथो नानपन ले आवत हावय अपन दाई ददा संग। हमर ददा ला गौटिया ददा काहय अऊ मोला गौटिया भइया कहिथे। छोड़ ये मन ला जोन पूछ तास करेके हावय बिहनिया करबे । अभी सुतो जावव ।”
सब अपन अपन घर रेंग दिस। गौटिया के पांव परिस गोदावरी अऊ जीवन हा ।
“मोला बचा लेस भइया तोर लइका लोग दूधे खाये दूधे अचोवय। शीतला दाई के मया कभू कमती झन होवय। जय होवय गौटिया तोर जय होवय।” नोनी अऊ जीवन घला अब सुते के तियारी करत हावय।
इंस्पेक्टर अऊ गौटिया अब गोठियावत हावव अऊ सिपाही मन माखुर रमजत हावय। गोदावरी बरतन ला तिरियाइस अऊ नल ले बाल्टी भर पानी भर के मुहु धोये लागिस। शिकल दमकत हावय। उज्जर पण्डरी काया चन्दा अंजोरी मा अब्बड़ सुघ्घर लागत हावय। बड़का आंखी अऊ गोदना सब ला देखिस इंस्पेक्टर हा गाड़ी लाइट के अंजोर मा ।
“ये …..कल सुबह थाना आना हाजरी दिलाने नहीं तो तुम्हारा खण्डरी उधेड़ दूंगा।”
गोदावरी डर्रागे।
“जी …जी साहब” हाथ जोर के किहिस। गौटिया घला अपन घर कोती जावत हावय।
गोसाइया के मोबाइल ला देखिस। बारा बजत रिहिस। अऊ ओखर ले जादा बारा बाजे हावय गोदावरी के सिकल मा । का होही परमात्मा ? का होही महाबीर…? रात भर नींद नइ आइस। भिनसरहा गौटिया घर चल दिस। अऊ अब थाना अमरगे हावय।
साहब आइस बारा बजे। थाना के अंगना मा अपन लइका ला दूध पियावत गोदावरी ला देखिस ।
“लाल लुगरा मा बम हावय साली हा … एकदम कुँवारी लागथे ।” साहब लार टपकावत किहिस।
कोटवार आइस गोदावरी ला अकेल्ला बलावत हावय साहब हा अपन केबिन मा। गोदावरी चल दिस केबिन मा।
“जिस्मफरोशी का मामला है पीटा एक्ट लगा कर बन्द कर दूंगा। कुछ लेन देन हो जाये तब छोड़ सकता हूँ ।” गरजिस थानादार हा।
“मेहा कोई जिस्म बेचे के धंधा नइ करत रेहेंव साहब। मंदहा हा झपाये रिहिस। इही सिरतोन आवय अऊ येला अब्बड़ बेरा ले कही डारे हव। …अऊ मोर करा तो कुछु नइ हावय देये बर।”
“हावय न ! जोन तोर करा हावय ओ आने करा नइ हावय । एक बेर मोर मालखाना मा चल । “
“काबर। ? “
“नइ जानस ..?
“चल तब बताहू मालखाना मा का होथे तोन ला अकेल्ला ।” “ताहन छोड़ देबे ।”
“हाव मोला खुश कर दे ताहन तहु उछाह मा रहिबे जीवन भर। “
“सब बर छुआ मानथो अऊ मोर देहे ला छूबे तब नइ छुआ जाबे साहेब ?”
“जिस्म के सुख में छुआछूत नही होता पगली । चल जल्दी एस पी साहब का मीटिंग है शाम को।”
“पहिली पानी पी लेथो साहेब ताहन आहू ।” गोदावरी निकल गे। अऊ आइस तब अपन फोन मा गोठियावत आइस। ओखर सिकल भभकत हावय महिषासुर मर्दिनी कस।
“रिकॉर्डिंग भेज देहो देख लेबे थानेदार हा मोर सौदा करत हावय ओखर वीडियो ऑडियो आय । एस पी, महिला आयोग अऊ एस टी एस सी आयोग मा फॉरवर्ड कर देबे।” “क्या …क्या..?.किसके साथ बात कर रही हो। क्या बक रही हो …?
“कुछु नही साहब जिस्म के सुख मा छुआछूत नइ होवय तौन ला बतावत हावव गौटिया ला, गोसाइया ला अऊ परिचित के वकील दीदी ला…।”
थानेदार अपन कुर्सी ले उछलगे। लाहर ताहर होंगे जइसे केवास म बइठ गे हावय।
“ते जतका पइसा कहिबे ओतका दुहु मोर नोकरी मा आंच झन आवन दे बहिनी…। “
थानादार अब गिड़गिड़ावत रिहिस।
“मोर गोसाइया ला मारे हस तेखर …मोला रोवाये हस ,लइका ला आंखी दिखाए हस । दिन भर थाना मा बइठे हव तेखर रोजी अऊ सबले बड़का गोठ रात भर जागे हव मानसिक पीड़ा झेले हव ..जम्मो के हिसाब बना ले हिसाब बनाये मा तुमन माहिर रहिथो ।” गोदावरी किहिस ।
पांच दस पन्दरा बीस …हजार रुपिया ला टेबल म राखिस द्राज ले निकाल के ।
“चालीस लागही साहब न एक कम न एक जादा।”
गोदावरी पइसा ला धरिस अऊ निकलगे लकर धकर।
थानादार गाल ला धर के थोथना ओरमा के ठाढ़े हावय जइसे कोनो थपरा मार देहे ।
रस्दा मा गौटिया ला जोहार करिस पांव परिस ।
अपन गॉंव कोती जावत हावय अब। ये थाना ले दूरिहा। नवाँ सपना देखत। सायकिल ढूलत हावय नवा संकल्प के संग , लइका मन ला पढाहुं।
नोनी हा सीखोये रिहिस मोबाईल चलाये बर फोन लगा के बात कर लेथे । अब रिकॉर्डिंग घला करे ला सीख जाहू वीडियो देखें बर गाना सुने बर घला सिख जाहू नवा संकल्प लिस गोदावरी हा।
-चन्द्रहास साहू
द्वारा श्री राजेश चौरसिया
आमातालाब के पास
श्रध्दा नगर धमतरी छत्तीसगढ़
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