बाल कविता श्रृंखला भाग-11: अफ़लू वर्षा पर बाल कविताएं-प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह

बाल कविता श्रृंखला भाग-11:

अफ़लू वर्षा पर बाल कविताएं

-प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह

बाल कविता श्रृंखला भाग-11: अफ़लू -प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह
बाल कविता श्रृंखला भाग-11: अफ़लू -प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह

वर्षा पर बाल कविताएं

गतांक- बाल कविता श्रृंखला भाग-10: संस्कृति

1. अफ़लू

एक फतिंगा दबे पाँव
बुकसेल्फ़ में आकर बैठ गया ,
सभी किताबों को उसने ,
एक एक कर देख लिया।

वहाँ समुद्रों को देखा
नदियां , पर्वत जंगल देखे
परियों , गुड़ियों की कई कथायें,
जीव जंतु कितने ही देखे।

मछली, मेढक व्हेल , पिराना
शार्क बड़े से , सी अर्चिन ,
देखा उसने , हुआ बहुत खुश ,
सोच रह लें ,यहाँ कई दिन।

नज़र पड़ी आर्या की उसपर
उसने उसको पास बुलाया।
वह भी ख़ुश थी उसे देखकर
स्कूल की ,उसको बात बताया।

कहा फतिंगे ने उससे
अफ़लू मेरा नाम
पास पेड़ पर रहता हूँ मैं ,
दीदी , आप बताओ नाम।

2. अफ़लू रहा कई दिन घर में

अफ़लू रहा कई दिन घर में ,
कई- कई भाषायें सीखीं ,
रोज़ कहानी सुना ,सुनाया
बच्चों की दिनचर्या सीखी।

फिर आर्या से अनुमति लेकर ,
बोला , जाने दो दीदी।
गोल्डन को लेकर आऊँगा
गोल्डन मेरा दोस्त वहाँ पर।
बाहर पास बगीचे में
वहीं पेड़ पर रहता है वह ,
बहुत शक्तिशाली जुगनू है।

कई यात्रायें की उसने
उसे कहानी पता हज़ारों
कहाँ कहाँ घूमा है बाहर ,
उसको लेकर आऊँगा।
हम सब मिलकर बैठेंगे ,
तब तक आप पढ़ो कुछ अपनी
नयी किताबें , नयी कहानी।

वर्षा पर बाल कविताएं-

1.लगातार बरसा पानी

लगातार बरसा पानी ,
हवा चली कुछ तूफानी।
डरी गिलहरी भागी आयी
भीगी शाखा , भीगी डाली।
लगातार बरसा पानी।
देखा ज्यों बच्चे ने वहाँ गिलहरी
पास बुलाया उसे बिठाया ,
दिया उसे कुछ खाना पानी।
कहा रहो तुम इस कोने में
यहाँ सुरक्षित समझो बैठो।
जरा देर सुस्ता लो तुम ,
ले आता कुछ दाना पानी।

2. रात अचानक बरसा पानी

उमस हो रही कई दिनों से
रात अचानक बरसा पानी।
बड़ी- बड़ी बूंदों में वर्षा,
तेज़ हवा में उलझी डाली
बड़े बड़े बूंदों में वर्षा।

कैसे कैसे रूप निराले
मौसम ले कर आ जाता है ,
कभी गरजता , कभी उमड़ता ,
बिन बरसे बादल उड़ जाता।

कभी -कभी छोटा सा बादल,
बड़ा अचानक हो जाता है।
लगता बूंदा- बांदी होगी ,
पर बौछारों से भर जाता है।

3. ज्यों ही काले बादल छाये

ज्यों ही काले बादल छाये
बच्चे घर में दौड़े आये।
बहुत दिखे खुश उनके चेहरे
मिलकर छोटी नाव बनायी।
इतने में बौछारें तेज़
दिखी हवा के साथ खेलतीं ,
बच्चों ने देखा वर्षा को ,
बारिश थमते नाव चलायी।
वर्षा की कुछ अलग कहानी
सबने कुछ कुछ अलग बताई।

-डॉ रवीन्द्र प्रताप सिंह

(डॉ रवीन्द्र प्रताप सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर हैं। वे हिंदी और अंग्रेजी में समान अधिकार से लिखने वाले जाने माने नाटककार , कवि एवं समीक्षक हैं। )

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