बाल कविता श्रृंखला भाग-5:
पशु पक्षी
-प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह

1. मैना पीली चोंच वाली
मैना पीली चोंच वाली
बैठ गयी आकर खिड़की पर ,
बहुत दूर से उड़ती आयी ,
लेकर कितने गीत कहानी।
कल भी आयी थी मैना
बैठी थी कुछ कहती थी ,
आप किन्तु सोये थे , बच्चे ,
चली गयी वह गाने गाकर।
2. गिलहरी
सुबह छह बजे रोज़ गिलहरी
उछल कूद करते आती है।
छोटे छोटे पंजों से ,
तार पकड़ झूला करती है ,
दूर दूर तक हो आती है।
इधर -उधर की बातें लेकर
तरह- तरह की बातें लेकर
उन्हें सुनाते गाना गाते
रोज़ सुबह ये आ जाती है।
3. उल्लू
एक बड़ा सा उल्लू आकर
रोज़ रात बैठा करता है
बहुत तेज़ इसकी आँखें
चिड़ियों को भय देती रहतीं।
रात में जागने वाला प्राणी
दिन भर यह दुबका रहता है ,
और शाम होते ही आकर
चिड़ियों में दर भर देता है।
4. हमिंग चिड़िया
क्यूबा में पायी जाती है
कैसे उड़कर आयी होगी !
सोच रहा हूँ इन्हे देखकर
तय की दूरी कैसे उड़कर !
वे दो प्यारी नन्ही चिड़िया
चोंच बड़ी है वे छोटी सी।
प्यारी नन्ही हमिंग चिड़िया
क्यूबा से आयी हैं उड़कर।
फूलों पर मंडराती यह
बाहर गर्मी तेज़ दुपहरी
फूलों सी ही लगती यह
प्यारी कितनी हमिंग चिड़िया !
5. कौआ
आया कौआ लगा बताने
कथा कहानी बातें।
घंटों तक बोला करता है ,
कितनी ज्यादा इसकी बातें।
सभी दोस्त हैं इसके
प्यारा कौआ काला।
बच्चे इससे खुश रहते हैं ,
यह गीत सुनाने वाला।
6. गौरैया जी
गौरैया जी आज हाँफते
सुबह- सुबह ही बोली ,
गर्मी कितनी तेज़ पड़ रही ,
आयी नहीं हमारी टोली।
नदियां सूख रहीं है अब तो
तालाबों में बस कीचड़ है।
घूप बड़ी ही तेज़ कड़क है
गर्मी से मन है बेकल।
गौरैया के बर्तन में
मैंने ताज़ा पानी डाला
पानी पीकर खुश होकर
वह मुस्काई पंख खोलकर।
7. टिमटिम
गुड़हल पर रहते हैं टिमटिम
लाल फूल के पीछे
हरे- हरे पत्तों के पीछे
हरे- हरे ही दिखते।
लम्बी पतली पूछ हिलाकर ,
छोटी आँखों को चमकाकर ,
टिमटिम चमका करते ,
कभी हरे वह , फिर मटमैले
रंग बदलते रहते।
-डॉ रवीन्द्र प्रताप सिंह
(डॉ रवीन्द्र प्रताप सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी एवं आधुनिक यूरोपीय भाषा विभाग में प्रोफेसर हैं। उन्होंने नाट्य , काव्य एवं समीक्षा विधाओं में ख्याति प्राप्त रचनाओं का सृजन किया है। लेखन एवं शिक्षण हेतु उन्हें सोलह पुरस्कार प्राप्त हैं। )