दोहा जनउला-अजय “अमृतांशु”

माटी के चोला हवय, आँच परे पक जाय। गरमी के मौसम रहय, सबके प्यास बुझाय।।

छत्‍तीसगढ़ी कहानी:शब्दभेदी बाण-चन्द्रहास साहू

छत्‍तीसगढ़ी कहानी : शब्‍दभेदेबाण नवा जमाना के पृष्‍ठभूमि म लिखे कहानी आय । ए कहानी म…

छत्तीसगढ़ी व्याकरण : वचन-डाॅ. विनोद कुमार वर्मा

ए आलेख म हमन देखबो के छत्‍तीसगढ़ी वचन काला कहिथे , एक वचन शब्‍द ले बहुवचन…

छत्तीसगढ़ी व्याकरण : काल-डॉ. विनोद कुमार वर्मा

कोनो भी भाषा के व्याकरण म काल के बहुत महत्व होथे काबर कि एकर ले समय…

जनजातीय कविता भाषा और संस्कृति-डुमन लाल ध्रुव

किसी भी देश या प्रदेश के जनजातीय कविता को समझने के लिए उस देश की उस…

जनजातीय कथा की लोक दृष्टि -डुमन लाल ध्रुव

जनजातीय कथा साहित्य की दृष्टि से देखें तो आदिवासियों का व्यावहारिक जीवन सदैव विद्यमान है। यहां…

छत्तीसगढ़ी व्याकरण : वाच्य अउ क्रिया-डॉ. विनोद कुमार वर्मा

क्रिया के रूपान्तरण ला वाच्य कहिथें। एकर ले ये पता चलथे कि वाक्य म काकर प्रधानता…

छत्तीसगढ़ी व्याकरण : विशेषण-विनोद कुमार वर्मा

जेन शब्द ले संज्ञा या सर्वनाम के आकार , अवस्था, रूप, गुण, स्वभाव अउ स्थिति के…

छत्तीसगढ़ी व्याकरण : शब्द साधन- संज्ञा अउ सर्वनाम

शब्द साधन के अन्तर्गत शब्द मन के भेद, ओखर प्रयोग, रूपान्तर अउ व्युत्पत्ति के निरूपण किए…

छत्तीसगढ़ी भाषा अउ देवनागरी लिपि- डाॅ विनोद कुमार वर्मा

''छत्तीसगढ़ी भाषा अउ देवनागरी लिपि विषय लिखे गे ए आलेख एक ठहर छत्‍तीसगढ़ी भाषा के भविष्‍य…