कर्मण्‍येवाधिकारस्‍ते भाग 12 एवं 13

कर्मण्‍येवाधिकारस्‍ते गतांक से आगे

कर्मण्‍येवाधिकारस्‍ते भाग 12 एवं 13
कर्मण्‍येवाधिकारस्‍ते भाग 12 एवं 13

कर्मण्‍येवाधिकारस्‍ते भाग 12

  यात्रा पथ
अपनी मंजिल पहले चुन लो
फिर   उस पथ    पग तौलौ
करते जाओ     पथ प्रशस्त
तुम बीज    फलों के बो लो

बोया    बीज    बबूल का
अमुवा  कहाँ से   पाये
खुद भी कंटक टीस सहे
संतति     काँटे    पाये

दरिया मिले   तो पूछो
साहिल  कहाँ मिलेगा
मौजों की   राह देखो
साहिल से जा मिलेगा

पर्वत मिले तो   उसको
झुक कर सलाम करना
दुश्वारीयों       से पहले
बेहतर है  तौबा करना

यह महाकाव्य की धरती है
कुछ गाथा तो   गढ़ते जाओ
डरो नही उस पार है मंजिल
साहस करके  चलते जाओ

हो सहज   सीधी सी राह
सभी      चल   लेते    हैं
मंजिल से   अपनी दूरी
अधिकाधिक कर लेते हैं

काम तुम्हारा   चलते जाना
ऊँची  नीची     चट्टानों पर
मुस्तकबिल उस पार तुम्हारा
नई  चेतना    मैदानों  पर

नई दिशायें   नये रास्ते
नव प्रभात   नव सपने
बेगाने भी लगने लगते
कितने    अपने अपने

राग-द्वेष  का     अंश नही
ईर्ष्या का     कोई दंश नही
सबकुछ है मनमीत तुम्हारा
टूटे सपनों का अपभ्रंश नही

युगों युगों से  चलता आया
कुछ ने खोया कुछ ने पाया
साथ रहेगी  यह  परिपाटी
यह तो है पुरखों की थाती

कर्मण्‍येवाधिकारस्‍ते भाग 13

हो सकता है   आने वाली
रात बड़ी    दुःखदाई  हो
अपने आँचल में समेटकर
विपदाओं को  लायी हो

बस इसीलिए   चलते जाना
जब तक मितवा   साँझ ढले
तुम मंजिल का चौखट लाँघो
तब  पश्चिम पथ    रवि चले

आगे पथ पर बाट जोहता
बैठा  है           मरूखण्ड
ऊपर तपता आसमान है
भू-पर मरू असीम अखंड

ढूहों को देखो   रेतों के
जो चले हवा तो छितराये
आसमान में उड़ती चिड़िया
किस्मत पर अपनी इतराये

बादल के सम्पुट दिखे अगर
जानो चल पड़ा बवंडर है
तांडव करता अनल उगलता
मृत्यु का   महा समंदर है

पल पल  मृत्यु का तांडव
नजदीक  तुम्हारे आयेगा
मृत्यु लीला  दिखलायेगा
सारा  सत्वर ढह जायेगा

चिल्लाना चाहोगे   किन्तु
मौन    कण्ठ हो   जायेगा
निर्बाध बहती रक्तकणिका
अवरुद्ध सा   हो  जायेगा

बंद होगी पलकों के पीछे
तुम्हारी   सारी   वेदना
मैं  करुँ  कैसे      बयाँ
वह   अन्तहीन  चेतना

मृत्यु भय से  मत घबराना
उर्ध्व गति से  चलते जाना
अटल सत्य है   मृत्यु यदि
तुम मृत्यु तक चलते जाना

साँस रही तो आगे पथ पर
मध्य    मरू        आता है
मरीचिका का नाम दूसरा
इसे    कहा     जाता     है

-बुद्धिसागर सोनी “प्यासा”
        रतनपुर,7470993869

शेष अगले भाग में –

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