पुस्तक समीक्षा-“सुरुज बनके चमकौ जग में”
समीक्षक-अजय अमृतांशु
कृति का नाम | सुरुज बन के चमकव जग में |
कृतिकार का नाम | डॉ. पीसी लाल यादव |
प्रकाशक | वैभव प्रकाशन रायपुर |
भाषा | छत्तीसगढ़ी |
विधा | काव्य |
समीक्षक | अजय अमृतांशु |

पुस्तक समीक्षा-“सुरुज बनके चमकौ जग में”
छत्तीसगढ़ी के वरिष्ठ गीतकार डॉ पी.सी.लाल यादव जी के गीत सँघरा “सुरुज बनके चमकौ जग में” पढ़े ला मिलिस । विविध रंग मा रंगे ये गीत संघरा ल पढ़ के मन आल्हादित होगे। यादव जी माटी ले जुड़े गीतकार आय जउन उँकर गीत संघरा म झलकथे। संघरा म एक डहर उमन श्रम गीत, खेत खलिहान, कमइया किसान के पीरा, तिहार, मेला मड़ई, लइका गीत अउ छोटे परिवार ल विषय बना के गीत लिखे हवय उँहे दूसर डहर मया-पीरित अउ विरह के गीत ल घलो समाहित करे हवय। कुल 50 गीत येमा संकलित हवय । उँकर होली गीत मन मे उल्लास भर देथे उँहे माटी के गीत मा धरती के महिमा के बखान हवय। यादव जी के करमा अउ रहस गीत के आनंद ही कुछु अउ हे । चुँकि उन श्रोता मन के नस-नस से वाकिफ हवय येकर सेती उँकर शब्द चयन अतका सटीक रहिथे कि गीत मन सीधा अन्तस मा उतरथे । उँकर गीत ल सुने के बाद आप गुनगुनाये बिना नइ रहि सकव । यादव जी के गीत मा प्रेम, श्रृंगार,विरह,माटी के महिमा, जीवन दर्शन छत्तीसगढ़िया के आन सबो जिनिस समाहित हवय। “सुरुज बनके चमकौ जग में” क्रांति के गीत आय जेमा उमन मुखर होके शोषक मन ला ललकारे हवय-
शोषण के छाती मा पटको पथरा
अन्याय बर बाँध लव मुटका ।
मेहनत करके भूखे झन रहव
हक नँगईया के कर दव कुटका।।
छत्तीसगढ़ महतारी बर उँकर मया देखव-
तीरथ बरथ के का साध करँव
सँऊहे सरग मोर गाँव रे ।
मैं छत्तीसगढ़िया ताँव रे….।
यादव जी के होरी गीत के बानगी –
रंग भर भर के मारे पिचकारी
करिया करलुठवा कान्हा सँगवारी
सखियन के भींजगे लुगरा पोलका
रहि-रहि देवय आनी-बानी गारी
अइसने ये संघरा के सबो गीत मन कर्णप्रिय हवय। आपके गीत सन्देश परक अउ जिनगी ल दिशा देवत हुए लिखाय हवय। गीतकार अपन उद्देश्य मा पूर्ण रूप ले सफल होय हे। नवा गीतकार मन ये संघरा ल जरूर पढ़य । सुग्घर संघरा खातिर यादव जी ला बधाई अउ शुभकामना ।
समीक्षक-अजय अमृतांशु