लघुकथा : मेडल -डॉ. विनोद कुमार वर्मा

           एक छह फीट ऊँचे गबरू जवान की नियुक्ति सब-इंसपेक्टर के पद पर यातायात पुलिस में…

गुल्लक (हिंदी लघुकथा)   – डॉ. विनोद कुमार वर्मा

            दस बरस की अंशु की छुट्टियाँ चल रही थी। आज शुक्रवार का दिन था। महीने…

पंडवानी की अमर स्वर-सम्राज्ञी तीजन बाई- डुमन लाल ध्रुव

भारत की सांस्कृतिक पहचान उसकी विविध लोककलाओं, लोकगीतों और लोकपरंपराओं में निहित है। देश के प्रत्येक…

सरस्वती सुता (लघुकथा)  ​- डॉ. विनोद कुमार वर्मा

       ​’अपनी पोती को कैसी शिक्षा दे रहे हैं वर्मा जी? हम जैसे विद्वानों को बुद्धू…

कहानी: लंगड़ा कौन? (आपबीती)​- डॉ. विनोद कुमार वर्मा

​( 1 ) एक लंगड़ा भिखारी बैसाखी पकड़े हाथ फैलाए खड़ा था। ‘दू रुपिया बाबूजी …..…

आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति का संकट

प्रस्तावना भारत की संस्कृति, संस्कार और परम्पराएँ हजारों वर्षों की तपस्या, अनुभव और सामाजिक प्रयोगों का…

एक राजर्षि की मूर्त कल्पना है शाहजहांपुर की पब्लिक लाइब्रेरी-प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह

तकनीकी क्रांति के इस दौर में जब सब कुछ डिजिटल माध्यमों पर सिमटता जा रहा है,…

विभीषण की प्रासंगिकता मेरे दृष्टिकोण में-डॉ. अर्जुन दुबे

विभीषण की प्रासंगिकता: “घर का भेदी” या सत्य का साहसी स्वर? भारतीय जनमानस में एक कहावत…

एक लघु कथा:जिंदगी, गरीबी, संघर्ष और जिम्मेदारी

जिंदगी, गरीबी, संघर्ष और जिम्मेदारी — डॉ. अर्जुन दुबे यह एक सच्ची घटना पर आधारित छोटी-सी…

संस्मरण :एक थी रउताइन

संस्मरण