एक छह फीट ऊँचे गबरू जवान की नियुक्ति सब-इंसपेक्टर के पद पर यातायात पुलिस में तीन बरस पहले हुई थी। उसकी सेना में भर्ती की तमाम कोशिशें नाकाम हुई क्योंकि बचपन में उसकी एक आँख थोड़ी तिरछी थी जो सरकारी अस्पताल में आपरेशन के बाद ठीक हो गया था परन्तु तिरछी आँख के आपरेशन के कारण उसे चश्मा लग गया था। सेना भर्ती नियम में बिना चश्में दृष्टि 6/6 या 6/9 होनी चाहिए। चश्में से दोनों आँखों की दृष्टि 6/6 जरूरी है। वह दूसरे मानदंड को पूरा करने से मामूली अंतर से चूक गया और सेना के लिए योग्य नहीं माना गया। अंततोगत्वा राज्य पुलिस सेवा में उसे नियुक्ति मिली। परन्तु यह क्या? ….. अब तक तीन साल के भीतर ही उसके चार स्थानान्तरण हो चुके थे और अब पाँचवे की बारी थी! अक्सर उसे छुटभैया नेताओं और उसके आकाओं के कोपभाजन का शिकार होना पड़ता था। मैथिलीशरण गुप्त की कविताएँ उसे बहुत प्रिय थी- पंचवटी कंठस्थ थी। अक्सर वह इन पंक्तियों को गुनगुनाया करता था-
*जितने कष्ट कण्टकों में है, जिनका जीवन-सुमन खिला।*
*गौरव गंध उन्हें उतना ही, यत्र-तत्र सर्वत्र मिला।*
उसके दोस्तों को ऐसा लगता था कि ईमानदारी ही उसकी दुश्मन बन गई है! वे अक्सर कहा करते थे- ‘ अरे, वह तो बावला है! कभी नहीं सुधरेगा!! ….. ‘ मगर वह संजीदगी से अपना काम करता रहा। ….. अपने माता-पिता से अक्सर कहा करता था कि सेना में नियुक्ति मिली तो वह वीरता के लिए कोई-न-कोई पदक लेकर जरूर आएगा! एक दिन उसके पिताजी ने रूवाँसे होकर कहा था- ‘ बेटा, रोजी-मजूरी करके अड़बड़ मुश्किल मा तोला पढ़ाये हँव। तँय पढ़े मा गधा रहिते त स्कूल ले निकाल के तहूँ ला रोजी-मजूरी मा लगा देतेंव। ….. तँय कुछु नि कमइबे त का खाबोन! अब तो तोला रोजी-मजूरी मा जाय बर घलो नि कहि सकँव। …. सेना मा भर्ती नि मिलिस त का होगे, लोकल पुलिस के नौकरी ला देख! कतेक दिन तोर खरचा ला उठाय सकबो? अब तो हमरो जाँगर थक गे हे! ….. ‘
उस दिन पूरे प्रदेश में वाहनों का सघन जाँच अभियान चल रहा था। एक ग्रामीण अपने परिवार सहित मोटर साइकिल में जा रहा था। हवलदार ने उसे रोका। पति-पत्नी दोनों के चेहरे पर घबराहट का भाव देखकर हवलदार हँसने लगा। पुलिस को मोटर साइकिल रोकते देखकर उसके दोनों बच्चे भी घबरा गये। हवलदार ने उसकी गाड़ी के कागजात की जाँच करने के बाद कहा- ‘ सर, कागजात ठीक है। चार सवारी का फाईन ठोंक देते हैं! ‘
‘ नहीं जाने दो! ‘
थोड़ी देर बाद हवलदार बोला- ‘ सर, आपने सरकारी राजस्व का नुकसान कर दिया! ‘
सब-इंस्पेक्टर मुस्कुराने लगा। हवलदार से रहा नहीं गया। वह फिर बोला- ‘ सर! न आप खाते हैं, न खाने देते हैं! ‘
सब-इंसपेक्टर जोर से हँसने लगा।
‘ बात खाने की नहीं है हवलदार साहब! वह भी हमारी-तुम्हारी तरह परिवार पालने के लिए बार-बार धक्के खा रहा होगा! अभाव की स्थिति में परिवार पालना कितना मुश्किल होता है इसे आप भी जान रहे होंगे। ‘
‘ जी सर! ‘
तभी हवलदार ने देखा कि दूर से एक चमचमाती कार आ रही है। उसने उसे हाथ दिखाकर रोका।
‘ कागजात प्लीज़। ‘
‘ यह मुख्यमंत्री की निजी कार है। मैं उनका लड़का हूँ! ‘
हवलदार डर गया। उसने कहा- ‘ सर, मुख्यमंत्री की गाड़ी है, जाने दें! ‘
‘ नहीं, गाड़ी का कागजात और ड्राइविंग लाइसेंस लेकर आओ! ‘
कार मुख्यमंत्री की ही थी। उसके कागजात की जाँच के बाद सब-इंसपेक्टर ने हवलदार से कहा- ‘ लाइसेंस रिन्यू नहीं हुआ है। दो हजार की फाईन काट दो! ‘
हवलदार के हाथ-पाँव काँपने लगे। सब-इंसपेक्टर ने कहा- ‘ घबराओ मत, लाओ, मैं रसीद काट देता हूँ! ‘
ठीक एक घंटे बाद एसपी साहब का फोन आया- ‘ अरे क्या करते हो? मुख्यमंत्री के निजी कार का चालान काट दिया! ‘
‘ कार का लाइसेंस रिन्यू नहीं हुआ था सर! ‘
‘ तुम्हारी ईमानदारी कभी-कभी मुझे भी परेशानी में डाल देती है! बहुत सारे काम हमें दबाव में करना पड़ता है। तुम्हारी शिकायतें आये दिन मिलती ही रहती है- किस-किस को जवाब दूँ? ‘
‘ साॅरी सर! मगर मैं क्या कर सकता हूँ। मुझे अम्मा-बाबूजी ने यही सिखाया है! ‘
‘ अब कुछ होगा तो तुम्ही भुगतो! …. काम बन्द कर तुरंत रायपुर रवाना हो जाओ। रात आठ बजे मुख्यमंत्री ने तुम्हें बुलाया है! फोन पर वे गुस्से में लग रहे थे! ….. अब तो भगवान ही तुम्हें उनके कोप से बचा सकता है! ‘
‘ सर, मुझे बुलाने की क्या जरूरत है? मैं तो बहुत छोटा कर्मचारी हूँ! ‘
‘ यही तो मैं भी समझ नहीं पा रहा हूँ! ….. जाओ, अपनी उपस्थिति दर्ज कराओ। इसके बाद एक और ट्रांसफर का इंतजार करो! ‘
‘ जी सर, जय हिन्द! ‘
………………
कुछ दिनों बाद, पास के शहर में शोर मच गया कि गाँव के एक गरीब परिवार के लड़के को पुलिस का राष्ट्रीय मैडल मिला है। ….. और फिर यह समाचार स्थानीय अखबारों की सुर्खियाँ बनी-
15 अगस्त को दिल्ली में छत्तीसगढ़ के 14 पुलिस कर्मियों को वीरता के लिए गैलेंट्री मेडल एवं 09 पुलिस कर्मियों को सराहनीय सेवा के लिए भारतीय पुलिस पदक प्रदान किया जायेगा। भारतीय पुलिस पदक प्राप्त करने वालों में बिलासपुर के पास के गाँव बिरकोनी के इंदिरा आवास में पले-बढ़े यातायात पुलिस में कार्यरत एक गरीब परिवार का लड़का हेमलाल मरकाम भी शामिल हैं जो अब पदोन्नति के बाद इंस्पेक्टर बन चुके हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पूर्व उसने मुख्यमंत्री के निजी वाहन को चालान कर दो हजार रूपयों का फाईन काट दिया था। वर्तमान में वह पदोन्नति पश्चात मुख्यमंत्री के निजी सुरक्षा में पदस्थ है। पुलिस विभाग में उत्कृष्ट काम करने वाले कर्मियों को ‘ आउट आफ टर्न ‘ पदोन्नति देने का नियम है। इसी के तहत उसे पदोन्नति दी गई है।
इस समाचार को पढ़कर सबसे ज्यादा खुश उसके दोस्त ही हुए क्योंकि वे जानते थे कि वही इस सम्मान के लायक है!
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डॉ विनोद कुमार वर्मा
व्याकरणविद्, कहानीकार, समीक्षक
मो- 98263 40331
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