अच्छा, यह परदेशी लगता है. वह कैसे? इसकी बोली अलग है, यह भावपूर्वक विनीत होकर हाव…
Author: Ramesh kumar Chauhan
रमेश कुमार चौहान हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा के कवि एवं लेखक हैं । विशेष रूप से आपका परिचय एक छंदकार के रूप में हैं । छत्तीसगढ़ी साहित्य में छंद बद्ध पांच किताबे प्रकाशित हैं वहीं हिन्दी में भी दो पुस्तकें प्रकाशित हैं । आप एक हिन्दी कंटेंट राइटर के रूप में भी सेवा दे रहे हैं ।
Hindi Poems of Ravindra Pratap Singh
'सतरंगी भाव इस बसंत' प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह का एक काव्य संग्रह है जिनमें उनके 11…
जब जाता है एक पिता -प्रो रवींद्र प्रताप सिंह
जब जाता है एक पिता: एक पुत्र का पिता के प्रति श्रद्धांजलि है।
एक व्यंग्य आलेख:शिक्षा व्यापार की प्रतिस्पर्धा
शिक्षा मे ब्रांड वैल्यू :हमारे देश में तो वर्तमान में स्कूली शिक्षा में तो पब्लिक स्कूलों,…
मेरी कविताएं-रवीन्द्र कुमार रतन
रवीन्द्र कुमार रतन की 'मेरी कविताएं' अपने प्रांत बिहार और देश को समर्पित कविता है ।…
डिजिटल युग का हिंदी साहित्य पर प्रभाव
डिजिटल उपकरणों ने लेखकों और प्रकाशकों के लिए नए माध्यम खोले हैं जिससे वे अपने लेखन…
छत्तीसगढ़ी कहानी:रज्जू
मैनखे अपन उमर के अलग- अलग पड़ाव में उतार-चढ़ाव भरे जिनगी जीथे। सुख-दुख, दिन-रात, बारिश, जाड़,…
छत्तीसगढ़ी कहानी: मोर गाँव के माटी चंदन – डॉ.अशोक आकाश
ओकर सरी फैसला पथरा के लकीर होथे में जानथों, जेला कहिथे तेकर ले माशा भर टस…
सभ्य, सज्जन और सभ्यता
आजकल प्रायः पढ़े-लिखे और धनाठ्य लोगों को सभ्य समझा जाता है अपेक्षाकृत कम पढ़े लिखे और…
क्या क्रय शक्ति की जरूरत है? (व्यंग्य मिश्रित आलेख)
क्रय शक्ति -Purchasing Power -कैसे प्राप्त कर सकते हैं. सीधा सा उत्तर लोग देते हैं कि…