सावन के हे ए महीना, उमड़े हे घटा घनघोर । सबके बिगड़े बनइया, बिनती ल सुनले…
Category: छत्तीसगढ़ी कविता, छंद, ग़ज़ल
सम्राट पृथ्वीराज चौहान गौरव गाथा (आल्हा छंद)
सबले पहिली माथ नवावय, हाथ जोर के तोर गणेश । अपन वंश के गौरव गाथा, फेर…
आल्हा चालीसा (आल्हा छंद)-कन्हैया साहू “अमित”
आल्हा चालीसा म आल्हा के जीवन चरित्र अउ पराक्रम के वर्णन ओखरे नाम म बने पराक्रम…
बालोद परिचय गाथा-कन्हैया लाल बारले
'बालोद परिचय गाथा' मधुर साहित्य परिषद ईकाई डौन्डी लोहारा जिला- बालोद (छत्तीसगढ़ ) के अध्यक्ष भाई…
छत्तीसगढ़ी नवगीत: नवा जमाना के नवा समस्या-रमेश चौहान
चना होरा कस, लइकापन लेसागे पेट भीतर लइका के संचरे ओखर बर कोठा खोजत हे, पढ़ई-लिखई…
छत्तीसगढ़ी कथा-कविता:किसान के पीरा-रमेश चौहान
ये कविता म एक गाँव के किसान अउ किसानी के समस्या ल एक कहानी के रूप…
किसान अउ किसानी के कविता-रमेश चौहान
नांगर बइला फांद, अर्र-तता रगियाये जब-जब धनहा मा, किसनहा गाँव के । दुनिया के रचयिता, जग…
गुरूनानक जयंती पर गीत-हे गुरूनानक देव के, आज परब परकास
हे गुरूनानक देव के, आज परब परकास । अपन हाथ ला जोर के, करत हवंव अरदास…
देवारी तिहार ऊँपर कविता-रमेश चौहान
देवारी तिहार ऊँपर कविता मजा आगे मजा आगे आसो के देवारी मा देवारी मा जुरे जुन्ना…