महतारी दिवस के अवसर म विशेष गीत-दाई के अँचरा दाई तोर अँचरा मा, जिनगी के सबो…
Category: छत्तीसगढ़ी साहित्य

छत्तीसगढ़ी साहित्य (chatisgarhi-sahitay) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ी साहित्य के प्रमुख साहित्य विधायों, लोकविधाओं पर रचनायें प्रकाशित की जा रही है । इस केटेगरी के अंतर्गत छत्तीसगढ़ी साहित्य के कहिनि, आलेख, तुकांत कविता, अतुकांत कविता, नवगीत, छंद, गजल, मुक्तक आदि के साथ ही लोक विधा जसगीत, फाग, ददरिया, करमा आदि के गीत और आलेख प्रकाशित किये जा रहे हैंं।
मातृदिवस पर छत्तीसगढ़ी दोहालरी
मातृदिवस पर छत्तीसगढ़ी दोहालरी मन मंदिर ममता मया, महतारी मा मान। कहाँ खोजबे देवता, दाई खुद…
छत्तीसगढ़ी बाल कविता: घरघुँदिया-कन्हैया साहू ‘अमित’
छत्तीसगढ़ी बाल कविता: घरघुँदिया-कन्हैया साहू 'अमित' यह एक छत्तीसगढ़ी बाल कविताओं का संग्रह है। ईश प्राथ्रना…
धरती महिमा (चौपाई छन्द) छत्तीसगढ़ी
धरती महिमा नँदिया तरिया बावली, जिनगी जग रखवार। माटी फुतका संग मा, धरती हमर अधार। जल…
पुस्तक समीक्षा : चंदैनी गोंदा की सुरभि यात्रा
पुस्तक समीक्षा : चंदैनी गोंदा की सुरभि यात्रा चंदैनी गोंदा के सिद्धहस्त शिल्पी थे दाऊ रामचंद्र…
धर्मेन्द्र निर्मल के देवीगीत
धर्मेन्द्र निर्मल के देवीगीत दाई तोर दरस बर आए हौं लाल टिकुली लाल चुरी लाल चुनरी…
छत्तीसगढ़ के जेवारा (जवारा) परब
छत्तीसगढ़ के जेवारा (जवारा) परब चइत नवरात मा माँ के अराधना करे बर अखण्ड़ जोत जलाथे…
छत्तीसगढ़ी कहानी: ‘डोकरी दाई मर गे’-डाॅ विनोद कुमार वर्मा
छत्तीसगढ़ी कहानी: 'डोकरी दाई मर गे'-डाॅ विनोद कुमार वर्मा 'तड़ !........तड़.!........ तड़ !..........' कई गोली सब-…
छत्तीसगढ़ी कहानी: ‘भइया के मया’- देवनारायण नगरिया
छत्तीसगढ़ी कहानी: 'भइया के मया'- देवनारायण नगरिया गरुवा ओईलत धुर्रा उड़त, सूरुज के बुड़त संझउती के…
होली गीत : धर्मेन्द्र निर्मल के पॉंचठन होली गीत
होलीगीत धर्मेन्द्र निर्मल के पॉंचठन होलीगीत फागुन रंग रंगे अमराई, महुआ महक जगाए। लाल गाल के…