"Purgation of Emotions and Feelings"
Category: विविधा

विविधा (Vividha) के अंतर्गत भारतीय दर्शन, भारतीय चिंतन, भारतीय परम्परा, तीज-त्यौहार के साथ-साथ समसमायिक विषयों पर आलेख प्रकाशित किये जा रहे हैं ।
तर्क (Logic) अथवा आचार (Ethics):एक व्यंग्य आलेख
आचार का अनुपालन, बहुत कठिन है डगर पनघट की! तर्क कठिन है किंतु उतना नहीं क्योंकि…
मेरा दृष्टिकोण:शब्द सौंदर्य, साहित्य के दर्पण में -प्रो. अर्जुन दूबे
सौंदर्य की चाहत और सौंदर्य वर्णन शाश्वत है । मानव और उसकी बनायी रचना चाहे चित्र…
लघु व्यंग्य:दांपत्य जीवन का संक्रमण
सा भार्याया गृहे दक्षा,सा भार्याया प्रियंवदा । सा भार्याया पति प्राणा, सा भार्याया पतिब्रता ।।
एक व्यंग्य आलेख:मैं चक्रवर्ती सम्राट बन कर रहूंगा -प्रोफेसर अर्जुन दूबे
प्राचीन काल में अश्वमेध घोड़ा छोड़ जाता था,चारो ओर वह भ्रमण करता था, यदि किसी ने…
सर्वाधिक आबादी को बोझ नहीं ताकत बनाएं
आज भारत विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन गया है। इसे बोझ समझने की बजाय …
लघु व्यंग्य: मर्म के बहाने-प्रोफेसर अर्जुन दूबे
अच्छा, यह परदेशी लगता है. वह कैसे? इसकी बोली अलग है, यह भावपूर्वक विनीत होकर हाव…
एक व्यंग्य आलेख:शिक्षा व्यापार की प्रतिस्पर्धा
शिक्षा मे ब्रांड वैल्यू :हमारे देश में तो वर्तमान में स्कूली शिक्षा में तो पब्लिक स्कूलों,…
डिजिटल युग का हिंदी साहित्य पर प्रभाव
डिजिटल उपकरणों ने लेखकों और प्रकाशकों के लिए नए माध्यम खोले हैं जिससे वे अपने लेखन…