गताँक (कर्मण्येवाधिकारस्ते भाग 22 एवं 23) से आगे

कर्मण्येवाधिकारस्ते भाग 24
........।।ःः वाधिकारस्ते ःः।।........ छोड़ो तुम इतिहास पुराना गीत नये युग का लिख डालो बीते कल की अकुलाहट में वृथा भरम मत मन में पालो गाँडीवधर शर संधान कर अरि शीश बचने पाये ना लपलपाती मृत्यु क्षुधा भूखी ही रह जाये ना होम कर नरमुण्ड समिधा क्रोध की ज्वाला जगा आचमन कर लहू का मृत्यु को हालाहल पीला जागो अर्जुन युद्ध करो पाँच्यजन्य मैं फूँक रहा तेरी यह कायरता पगले मेरे मन को हुक रहा रे मूढ़मते तू धनुष उठा पल प्रमाद में नाहक जाये पल पल बढ़ती मृत्युक्षुधा तुमको अपना ग्रास बनाये उठो धनुर्धर मृत्यु अब बड़वानल बनने वाली है भोग लगा उस पापिन को जगजान्हवी जनने वाली है क्यों खड़े सामने जिनको तुम अपना अ पना कहते हो यह समरभूमि है कौन किसी का मुझको लगता तुम डरते हो भाई मेरे बद संग लड़ना निष्काम योग कहलाता है योग क्षेमं वहाम्यहम् विश्व शिवम् बन जाता है अनासक्ति और आसक्ति पल पल की परिभाषा है पल के भीतर पाप-पुण्य आशा और निराशा है युग बदले हैं बदली सदियाँ पल पल परिवर्तन आता है जिस क्षण को जियो इतना जानो उस पलभर से तुम्हारा नाता है
कर्मण्येवाधिकारस्ते भाग 25
.......।।ःः वाधिकारस्ते ःः।।........ कल क्या होगा अंजान हो तुम प्रारब्ध नहीं इंसान हो तुम लेकर गढ़ लो आज की माटी भावी कल का पहचान हो तुम उठो भाई प्रत्यंचा तानो विपुल समिधा सम्मुख हैं संज्ञान करो हविज्वाला को स्वाहा - स्वधा कालमुख हैं सत् से सत्वर बनता हैं जब कर्मो का योग मिले सत्कर्मो के सायुज्जन से मानव का संयोग खिले उठो धनंजय नव प्रभात हैं उगता सूरज बढ़ जायेगा यही है जीवन यही नियति हैं पुरुषार्थ आहुति चढ़ जायेगा बलि दो बैरी का मृत्यु को शोणित सरित बहाओ तुम नरमुण्ड से भर दो रणभूमि मृत्यु लीला दिखलाओ तुम हे रूद्रप्रियंम तांडव कर लो मृत्यु पग धरने वाली है धू - धू जलता जठर ज्वाल दावानल बनने वाली है जो होनी हैं वो निश्चित है तुमको निमित्त ही बनना है कर्तापन का आवरण हटा तुम्हें निरासक्त हो लड़ना है व्यष्टि समष्टि तेरे भीतर तेरे भीतर है जग सारा यह महायुद्ध संयोग नहीं मन के भीतर महाभारत सारा जो घुट घुट कर रह जाते हैं वे लोग कहाँ जी पाते हैं नई संस्कृति के मुँह से बुजदिल कायर कहलाते हैं रणवीर उठो जड़ता छोड़ो युद्ध करो कायरता छोड़ो मरीचिका की खातिर तुम नियति से मत नाता तोड़ो
-बुद्धिसागर सोनी "प्यासा" रतनपुर,7470993869