छत्तीसगढ़ी व्यंग- दसवा गिरहा दमांद -धर्मेन्द्र निर्मल
छत्तीसगढ़ी व्यंग-जोतिस के जानकार मन ल नौ ले उपरहा गिनतीच नइ आवय। तेकर सेती जोतिस म…
मानवता धर्म से भिन्न नहीं धर्म का अभिन्न अंग है
धर्म एक व्यापक शब्द है जिसके लिये कहा गया है-'धारयति इति धर्म:' अर्थात जिसे धारण किया…
शिशुपाल सिंह यादव ‘मुकुंद की 3 रचनाएं
शांति नहीं कोलाहल है,घर -घर जन-जन वाणी में त्यागो झूठी परंपरा को, आग लगा दो पानी…
कर्मण्येवाधिकारस्ते भाग 10 एवं 11-बुद्धिसागर सोनी
तुम साहस करके देखो तो दरिया भी राह दिखाती है उत्तुंग शिखर झुक जाता है मरू…
’चंदैनी गोंदा’ के अप्रतिम कला साधक: रामचन्द्र देशमुख-डुमन लाल ध्रुव
आज से लगभग सत्तर वर्ष पहले दाऊ रामचन्द्र देशमुख, द्वारा ‘छत्तीसगढ़ कला विकास मंडल’ का गठन…
दशहरा पर्व पर विशेष-‘अंत हो मन के रावण का’-मोहन निषाद
आज कल के इन कलयुगी दानवो की भाँती रावण ने कभी भी अपने बाहुबल का प्रयोग…
भगवान राम पर कविताएं: राममय छंदमाला-रमेश चौहान
राममय छंद माला में भगवान राम की मर्यादा कर्म एवं धर्म की स्थापना की अभिव्यक्ति विभिन्न…
धर्मेन्द्र निर्मल के छत्तीसगढ़ी व्यंग्य-बाढ़ ले आये बढ़वार
असाड़ बुलक गे सावनों निकलइया हे लपरहा बादर हा घुम घुम के भासन दे दे के…
श्रीमती तुलसी देवी तिवारी की कहानी- चिट्ठी
पूरन सादी वर्दी में घर से बाहर निकलने को तैयार हो रहा था कि डाकिये ने…
नवरात एवं दशहरा पर्व पर श्लेष चन्द्राकर की कुछ रचनाएं
विजयादशमी पर्व से, मिलता यह संदेश। बनता कारण हार का, अहंकार आवेश।१। जय-जय-जय हे शेरावाली। शान…