ramkumar-singh-chauhan-ke-bhajan यह जग का आर न पार है नहि दिखता भव धार है ।। सब जीव…
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दोहा-मुक्तक परिभाषा और उदाहरण
दोहा-मुक्तक परिभाषा और उदाहरण जैसे की नाम से ही स्पष्ट हो रहा यह दोहा शिल्प पर…
लघुकथा:’बासी-चरित्र’ -दिनेश चौहान
कजरी काम निपटाकर घर जाने लगी तो मालकिन ने धीरे से कहा, "कजरी, ये रात की…
karmnewadhikarste-2छायावादी खण्ड़काव्य-‘कर्मण्येवाधिकारस्ते’ भाग-2
नवसृष्टि का सृजन कहे उठ जाग अरे ओ मूढ़मते कुछ काम नया अंजाम नया करता जा…