(तोमर छंद) आसन सुग्हर बिछाय । नारदजी ल बइठाय वेद व्यास धरत ध्यान । पूजय सब…
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रमेशकुमार सिंह चौहान

रमेशकुमार सिंह चौहान, जिसे रमेश चौहान के नाम से जाना जाता है । छत्तीसगढ़ के स्थापित साहित्यकार हैं । ऐसे तो आप हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी दोनों भाषाओं में लिखते हैं किन्तु आप का परिचय एक छत्तीसगढ़ी छंदकार के रूप में होता है । छत्तीसगढ़ी में छंद की पुनर्स्थापना में महती योगदान हैं । आपने फेसबुक पेज ‘छत्तीसगढ़ी साहित्य मंच’ के माध्यम से ‘पागा कलगी’ नाम कविताओं का आयोजन करके नव साहित्यकारों शिल्प विधान में कविता लिखने को प्रेरित किये । जिसको आज सुखद परिणाम देखने को मिल रहा है बहुुतायत लोग छंद, मुक्तक को विधान में लिख रहे हैं । आप इस ‘सुरता’ वेबसाइट के संपादक हैं ।
छत्तीसगढ़ी म भागवत कथा भाग-4. व्यासजी ल असंतोष होना
अध्याय-4. व्यासजी ला असंतोष होना (भव छंद) द्वापर के बात हे । सूतजी बतात हे सत्यवती…
छत्तीसगढ़ी म भागवत कथा भाग-3 भगवान के चौबीस अवतार कथा
भगवान के चौबीस अवतार (शिव छंद) जेन कुछु सरूप हे । श्रीहरिमय रूप हे रूप घात…
छत्तीसगढ़ी म भागवत कथा भाग-2 ब्रम्हाजी के उत्पत्ति के कथा
ब्रम्हाजी के उत्पत्ती (अहीर छंद) जड़ चेतन सब रूप । एक श्याम हर भूप सुनय सबो…
छत्तीसगढ़ी म भागवत कथा भाग-1. मंगलाचरण, कथा आरंभ
'छत्तीसगढ़ी म भागवत कथा' एक महाकाव्य के रूप म लिखे जात हे ऐला धीरे-धीरे कई भाग…
मेरी नई कविताएं-रमेश चौहान
अनसुनी बातें सुनता रहा मैं अनकही बातें कहता रहा मैं अनदेखी दृश्य को देखकर ।
पांच सात पांच (जापानी विधा में हिन्दी कवितायें)
'पांच सात पांच' मेरी (रमेश चौहान) लिखी गई जापानी विधा में हिन्दी कविताओं का संग्रह है…