आज भारत विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन गया है। इसे बोझ समझने की बजाय …
Tag: रमेशकुमार सिंह चौहान
रमेशकुमार सिंह चौहान

रमेशकुमार सिंह चौहान, जिसे रमेश चौहान के नाम से जाना जाता है । छत्तीसगढ़ के स्थापित साहित्यकार हैं । ऐसे तो आप हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी दोनों भाषाओं में लिखते हैं किन्तु आप का परिचय एक छत्तीसगढ़ी छंदकार के रूप में होता है । छत्तीसगढ़ी में छंद की पुनर्स्थापना में महती योगदान हैं । आपने फेसबुक पेज ‘छत्तीसगढ़ी साहित्य मंच’ के माध्यम से ‘पागा कलगी’ नाम कविताओं का आयोजन करके नव साहित्यकारों शिल्प विधान में कविता लिखने को प्रेरित किये । जिसको आज सुखद परिणाम देखने को मिल रहा है बहुुतायत लोग छंद, मुक्तक को विधान में लिख रहे हैं । आप इस ‘सुरता’ वेबसाइट के संपादक हैं ।
डिजिटल युग का हिंदी साहित्य पर प्रभाव
डिजिटल उपकरणों ने लेखकों और प्रकाशकों के लिए नए माध्यम खोले हैं जिससे वे अपने लेखन…
सभ्य, सज्जन और सभ्यता
आजकल प्रायः पढ़े-लिखे और धनाठ्य लोगों को सभ्य समझा जाता है अपेक्षाकृत कम पढ़े लिखे और…
फागगीत: भारतीय लोकगीत की समृद्ध परम्परा
भारतीय लोक गीत भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिबिंब हैं। यह प्राचीन काल से ही…
हिंदी भाषा का वैश्वीकरण
वैश्वीकरण के सबसे महत्वपूर्ण प्रभावों में से एक भाषा का प्रसार है, और हिंदी इसका अपवाद…
प्रेम ही जीवन है, जीवन ही प्रेम है
आइए हम प्यार को अपनाएं, इसे अपने जीवन यात्रा में मार्गदर्शक, प्रकाश स्तंभ, और शक्ति पुंज…
दोहा मुक्तक के कुछ रंग -रमेश चौहान
दोहा मुक्तक में दोहा शिल्प के आधार पर प्रचलित मुक्तक का गठन किया जाता है, इस…