यह तो सर्वविदित है कि भाषा ही संवाद का एक सशक्त माध्यम है, यह भाषा ही…
Tag: डॉ. अर्जुन दुबे
तर्क (Logic) अथवा आचार (Ethics):एक व्यंग्य आलेख
आचार का अनुपालन, बहुत कठिन है डगर पनघट की! तर्क कठिन है किंतु उतना नहीं क्योंकि…
मेरा दृष्टिकोण:शब्द सौंदर्य, साहित्य के दर्पण में -प्रो. अर्जुन दूबे
सौंदर्य की चाहत और सौंदर्य वर्णन शाश्वत है । मानव और उसकी बनायी रचना चाहे चित्र…
लघु व्यंग्य:दांपत्य जीवन का संक्रमण
सा भार्याया गृहे दक्षा,सा भार्याया प्रियंवदा । सा भार्याया पति प्राणा, सा भार्याया पतिब्रता ।।
एक व्यंग्य आलेख:मैं चक्रवर्ती सम्राट बन कर रहूंगा -प्रोफेसर अर्जुन दूबे
प्राचीन काल में अश्वमेध घोड़ा छोड़ जाता था,चारो ओर वह भ्रमण करता था, यदि किसी ने…
क्या क्रय शक्ति की जरूरत है? (व्यंग्य मिश्रित आलेख)
क्रय शक्ति -Purchasing Power -कैसे प्राप्त कर सकते हैं. सीधा सा उत्तर लोग देते हैं कि…
मेरा दृष्टिकोण: सनातन मुझे क्यों भावे-डॉं. अर्जुन दूबे
हिंदू-सनातन एक दूसरे के पर्याय जाने जाते हैं; सनातन तो शास्वत है जिसे हिंदू धरोहर के…
हास्य व्यंग आलेख:नव उपनिवेशवाद-डॉ. अर्जुन दूबे
इस हास्य व्यंग्य आलेख में भारत के मानसिक दास्ता पर व्यंग्य करते हुए दो आलेख प्रकाशित…
आलेख महोत्सव: 22.स्वतंत्रता का अमृत पान
स्वतंत्रता क्या अमृत है? अमृत एक ऐसा पेय है जिसके पीने मात्र से ही अमरत्व मिल…