पुस्तक समीक्षा-“सुरुज बनके चमकौ जग में”

छत्तीसगढ़ी के वरिष्ठ गीतकार डॉ पी.सी.लाल यादव जी के गीत सँघरा "सुरुज बनके चमकौ जग में"…

पुस्‍तक समीक्षा: छन्‍द संदेश

छन्दकार जगदीश "हीरा" साहू के कृति "छन्द संदेश " के आय जेमा उन आज के नपुंसक…

पुस्तक समीक्षा: महापरसाद

मनीराम साहू"मितान" जी के "महापरसाद" पढ़े बर मिलिस। ये कृति भक्तिन दाई "करमा" के जीवन उपर…

छत्‍तीसगढ़ी कथा-कविता:किसान के पीरा-रमेश चौहान

ये कविता म एक गाँव के किसान अउ किसानी के समस्‍या ल एक कहानी के रूप…

किसान अउ किसानी के कविता-रमेश चौहान

नांगर बइला फांद, अर्र-तता रगियाये जब-जब धनहा मा, किसनहा गाँव के । दुनिया के रचयिता, जग…

छत्‍तीसगढ़ी हाना छत्तीसगढ़िया लोकजीवन की गाथा-रमेश चौहान

हिन्दी भाषा में जिसे कहावत कहते हैं, उसे ही छत्‍तीसगढ़ी भाषा में हाना कहा जाता है…

छत्‍तीसगढ़ी कहानी: सोहाई -चन्‍द्रहास साहू

"सोहाई बनाथन फुलगजरा ! (सोहाई पशुधन के नरी मा बांधे जाथे जौन हा मोर पांख, परसा…

गुरूनानक जयंती पर गीत-हे गुरूनानक देव के, आज परब परकास

हे गुरूनानक देव के, आज परब परकास । अपन हाथ ला जोर के, करत हवंव अरदास…

देवारी तिहार ऊँपर कविता-रमेश चौहान

देवारी तिहार ऊँपर कविता मजा आगे मजा आगे आसो के देवारी मा देवारी मा जुरे जुन्ना…

छत्‍तीसगढ़ महतारी के वंदना-रमेश चौहान

छत्‍तीसगढ़ महतारी के वंदना हे दाई छत्तीसगढ़, हाथ जोड़ परनाम। घात मयारू तैं हवस, दया मया…