धरती में माता-पिता को ईश्वर का जीवंत प्रतिमूर्ति माना गया है । यह केवल एक मान्यता…
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रमेशकुमार सिंह चौहान

रमेशकुमार सिंह चौहान, जिसे रमेश चौहान के नाम से जाना जाता है । छत्तीसगढ़ के स्थापित साहित्यकार हैं । ऐसे तो आप हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी दोनों भाषाओं में लिखते हैं किन्तु आप का परिचय एक छत्तीसगढ़ी छंदकार के रूप में होता है । छत्तीसगढ़ी में छंद की पुनर्स्थापना में महती योगदान हैं । आपने फेसबुक पेज ‘छत्तीसगढ़ी साहित्य मंच’ के माध्यम से ‘पागा कलगी’ नाम कविताओं का आयोजन करके नव साहित्यकारों शिल्प विधान में कविता लिखने को प्रेरित किये । जिसको आज सुखद परिणाम देखने को मिल रहा है बहुुतायत लोग छंद, मुक्तक को विधान में लिख रहे हैं । आप इस ‘सुरता’ वेबसाइट के संपादक हैं ।
पारिवारिक सामाजिक प्रगाढ़ता का पर्व भाई-दूज -रमेश चौहान
भाई-दूज का पर्व केवल सहोदर भाई बहनों के मध्य नहीं मनाया जाता अपितु चचेरे, ममेरे, फूफेरों…
छत्तीसगढ़ के देवारी तिहार -रमेश चौहान
छत्तीसगढ़ के देवारी तिहार देश म मनाये जाने वाला दीपावली तिहारे आय फेर पॉंच दिन के…
दीपावली का अध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व -रमेश चौहान
दीपावली का अध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व - राम का रामत्व स्थापित होने का पर्व है दीपावली…
दीपोत्सव छंदमाला-रमेश चौहान
चलो जलायें दीप, हृदय आलोकित करने । छोड़े सकल विषाद, हर्ष मन में हैं भरने ।।…
पंथीगीत संग्रह:रमेश चौहान के 5 ठन पंथीगीत
छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध संत परम पूज्य घासीदास का यशोगान पंथीगीत कहलाता है । यहां पंथी 5…
विवाह के लिये सही आयु: यदि बाल विवाह नहीं होना चाहिये तो अधेड़ विवाह भी नहीं होना चाहिये
विवाह के लिये आवश्क है कि व्यक्ति तन और मन दोनों से परिपक्व हो । यह…
नवगीत-ई-मेल किया है परिवार नेे-रमेश चौहान
नवगीत-ई-मेल किया है परिवार नेे घर के एक-एक लोग को, ई-मेल किया है परिवार ने साथ रहकर…
रमेश चौहान के छत्तीसगढ़ी कहानी :- चार बेटा राम के कौड़ी के न काम के
छत्तीसगढ़ी कहानी 'चार बेटा राम के कोड़ी के ना काम के' हमर देश राज म परिवार…
मेरे दो नवगीतः-रमेश चौहान
प्राण प्रिये हे लेखनी, चलिये कंटक राह विषय उपेक्षित अरू वंचित जो, रखिये उनको साथ ।…