आचार का अनुपालन, बहुत कठिन है डगर पनघट की! तर्क कठिन है किंतु उतना नहीं क्योंकि…
Author: Ramesh kumar Chauhan
रमेश कुमार चौहान हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा के कवि एवं लेखक हैं । विशेष रूप से आपका परिचय एक छंदकार के रूप में हैं । छत्तीसगढ़ी साहित्य में छंद बद्ध पांच किताबे प्रकाशित हैं वहीं हिन्दी में भी दो पुस्तकें प्रकाशित हैं । आप एक हिन्दी कंटेंट राइटर के रूप में भी सेवा दे रहे हैं ।
मेरा दृष्टिकोण:शब्द सौंदर्य, साहित्य के दर्पण में -प्रो. अर्जुन दूबे
सौंदर्य की चाहत और सौंदर्य वर्णन शाश्वत है । मानव और उसकी बनायी रचना चाहे चित्र…
पांच सात पांच (जापानी विधा में हिन्दी कवितायें)
'पांच सात पांच' मेरी (रमेश चौहान) लिखी गई जापानी विधा में हिन्दी कविताओं का संग्रह है…
लघु व्यंग्य:दांपत्य जीवन का संक्रमण
सा भार्याया गृहे दक्षा,सा भार्याया प्रियंवदा । सा भार्याया पति प्राणा, सा भार्याया पतिब्रता ।।
बाल साहित्य (कविता):डोका और लोका-प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह
डोका और लोका पुस्तक डोका और लोका नामक दो बंदरों के साहस की कहानी है। बाल…
बाल गीत- नानी के घर जाबो (सार छंद)
छुट्टी होगे गरमी के अब, नानी के घर जाबो। पढ़ना-लिखना छोड़ अभी हम, नँगते मजा उड़ाबो।।
एक व्यंग्य आलेख:मैं चक्रवर्ती सम्राट बन कर रहूंगा -प्रोफेसर अर्जुन दूबे
प्राचीन काल में अश्वमेध घोड़ा छोड़ जाता था,चारो ओर वह भ्रमण करता था, यदि किसी ने…
बाल साहित्य (कविता):डोका और लोका-प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह
डोका और लोका पुस्तक डोका और लोका नामक दो बंदरों के साहस की कहानी है। बाल…