कोनो भी भाषा के व्याकरण म काल के बहुत महत्व होथे काबर कि एकर ले समय…
Category: छत्तीसगढ़ी साहित्य

छत्तीसगढ़ी साहित्य (chatisgarhi-sahitay) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ी साहित्य के प्रमुख साहित्य विधायों, लोकविधाओं पर रचनायें प्रकाशित की जा रही है । इस केटेगरी के अंतर्गत छत्तीसगढ़ी साहित्य के कहिनि, आलेख, तुकांत कविता, अतुकांत कविता, नवगीत, छंद, गजल, मुक्तक आदि के साथ ही लोक विधा जसगीत, फाग, ददरिया, करमा आदि के गीत और आलेख प्रकाशित किये जा रहे हैंं।
जनजातीय कविता भाषा और संस्कृति-डुमन लाल ध्रुव
किसी भी देश या प्रदेश के जनजातीय कविता को समझने के लिए उस देश की उस…
जनजातीय कथा की लोक दृष्टि -डुमन लाल ध्रुव
जनजातीय कथा साहित्य की दृष्टि से देखें तो आदिवासियों का व्यावहारिक जीवन सदैव विद्यमान है। यहां…
छत्तीसगढ़ी व्याकरण : वाच्य अउ क्रिया-डॉ. विनोद कुमार वर्मा
क्रिया के रूपान्तरण ला वाच्य कहिथें। एकर ले ये पता चलथे कि वाक्य म काकर प्रधानता…
छत्तीसगढ़ी व्याकरण : विशेषण-विनोद कुमार वर्मा
जेन शब्द ले संज्ञा या सर्वनाम के आकार , अवस्था, रूप, गुण, स्वभाव अउ स्थिति के…
छत्तीसगढ़ी व्याकरण : शब्द साधन- संज्ञा अउ सर्वनाम
शब्द साधन के अन्तर्गत शब्द मन के भेद, ओखर प्रयोग, रूपान्तर अउ व्युत्पत्ति के निरूपण किए…
छत्तीसगढ़ी भाषा अउ देवनागरी लिपि- डाॅ विनोद कुमार वर्मा
''छत्तीसगढ़ी भाषा अउ देवनागरी लिपि विषय लिखे गे ए आलेख एक ठहर छत्तीसगढ़ी भाषा के भविष्य…
जनकवि कोदूराम “दलित” के काव्य मा नारी विमर्श
दलित जी गाँव-गँवई ल जिये रहिन अउ छत्तीसगढ़ ल करीब ले देखे रहिन येकर सेती उन…
छत्तीसगढ़ के तिज तिहार:गीत अउ उमंग के तिहार होरी
गीत अउ उमंग के तिहार होरी -रमेश चौहान होरी के फाग गीत के बाते अलग हे- हर…
बात हे अभिमान के छत्तीसगढ़ी स्वाभिमान के-अजय अमृतांशु
हर बछर 21 फरवरी के दिन ला विश्व महतारी भाखा दिवस के रूप म मनाये जाथे।…