हिन्दी भाषा में जिसे कहावत कहते हैं, उसे ही छत्तीसगढ़ी भाषा में हाना कहा जाता है…
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रासपंचाध्यायी रासलीला अध्याय-2 -रमेश चौहान
श्याम दृश्य हिन हुये अचानक । व्यथा दशा तब हुई भयानक ज्यों हथनी गजराज विहीना ।…
गुरूनानक जयंती पर गीत-हे गुरूनानक देव के, आज परब परकास
हे गुरूनानक देव के, आज परब परकास । अपन हाथ ला जोर के, करत हवंव अरदास…
सामाजिक प्राणी का आधार परिवार-रमेश चौहान
"वह सम्मिलित वासवाले रक्त संबंधियों का समूह, जिसमें विवाह और दत्तक प्रथा स्वीकृत व्यक्ति सम्मिलित होता है परिवार…
देवार का दर्द (विमुक्त जाति-देवार)
देवार भारत की एक घुमंतु जनजाति है। यह मुख्यतः छत्तीसगढ़ में पायी जाती है। ये प्रायः…
हिन्दी साहित्य में क्षेत्रीय बोली-भाषाओं का योगदान
जब हम हिन्दी साहित्य में क्षेत्रीय बोलियों के योगदान पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो हमें…
चवपैया एवं त्रिभंगी छंद का संपूर्ण परिचय-रमेश चौहान
चपपैया और त्रिभंगी छंद सुनने में एक समान लगता है । ये दोनों ही छंद बहुप्रचलित…
घनाक्षरी छंद लिखना सीखें: घनाक्षरी छंद का संपूर्ण परिचय -रमेश चौहान
हिन्दी साहित्य के स्वर्णयुग में जहाँ भावों में भक्ति और अध्यात्म का वर्चस्व था वहीं काव्य…
देवारी तिहार ऊँपर कविता-रमेश चौहान
देवारी तिहार ऊँपर कविता मजा आगे मजा आगे आसो के देवारी मा देवारी मा जुरे जुन्ना…
छत्तीसगढ़ महतारी के वंदना-रमेश चौहान
छत्तीसगढ़ महतारी के वंदना हे दाई छत्तीसगढ़, हाथ जोड़ परनाम। घात मयारू तैं हवस, दया मया…