आज सारा विश्व पर्यावरणीय समस्या से जूझ रहा है, ‘ग्लोबल वार्मिंग‘ शब्द ट्रेन कर रहा है…
Tag: रमेश चौहान
छत्तीसगढ़ी कथा-कविता:किसान के पीरा-रमेश चौहान
ये कविता म एक गाँव के किसान अउ किसानी के समस्या ल एक कहानी के रूप…
किसान अउ किसानी के कविता-रमेश चौहान
नांगर बइला फांद, अर्र-तता रगियाये जब-जब धनहा मा, किसनहा गाँव के । दुनिया के रचयिता, जग…
छत्तीसगढ़ी हाना छत्तीसगढ़िया लोकजीवन की गाथा-रमेश चौहान
हिन्दी भाषा में जिसे कहावत कहते हैं, उसे ही छत्तीसगढ़ी भाषा में हाना कहा जाता है…
रासपंचाध्यायी रासलीला अध्याय-2 -रमेश चौहान
श्याम दृश्य हिन हुये अचानक । व्यथा दशा तब हुई भयानक ज्यों हथनी गजराज विहीना ।…
गुरूनानक जयंती पर गीत-हे गुरूनानक देव के, आज परब परकास
हे गुरूनानक देव के, आज परब परकास । अपन हाथ ला जोर के, करत हवंव अरदास…
सामाजिक प्राणी का आधार परिवार-रमेश चौहान
"वह सम्मिलित वासवाले रक्त संबंधियों का समूह, जिसमें विवाह और दत्तक प्रथा स्वीकृत व्यक्ति सम्मिलित होता है परिवार…
देवार का दर्द (विमुक्त जाति-देवार)
देवार भारत की एक घुमंतु जनजाति है। यह मुख्यतः छत्तीसगढ़ में पायी जाती है। ये प्रायः…
हिन्दी साहित्य में क्षेत्रीय बोली-भाषाओं का योगदान
जब हम हिन्दी साहित्य में क्षेत्रीय बोलियों के योगदान पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो हमें…
चवपैया एवं त्रिभंगी छंद का संपूर्ण परिचय-रमेश चौहान
चपपैया और त्रिभंगी छंद सुनने में एक समान लगता है । ये दोनों ही छंद बहुप्रचलित…