बालगीत-स्कूल बलावत हे

बालगीत टन-टन घंटी बाजत हे। चल-चल, स्कूल बलावत हे। पढ़ई-लिखई जिनगी हे। सार बात समझावत हे।

छत्तीसगढ़ के लोक जीवन म कबीर

छत्तीसगढ़िया मनखे के नस नस म कबीर समाय हवय कइहँव त ये बात अतिशंयोक्ति नइ होही।…

बाल गीत- नानी के घर जाबो (सार छंद)

छुट्टी होगे गरमी के अब, नानी के घर जाबो। पढ़ना-लिखना छोड़ अभी हम, नँगते मजा उड़ाबो।।

छत्तीसगढ़ी कहानी:रज्जू

मैनखे अपन उमर के अलग- अलग पड़ाव में उतार-चढ़ाव भरे जिनगी जीथे। सुख-दुख, दिन-रात, बारिश, जाड़,…

 छत्तीसगढ़ी कहानी: मोर गाँव के माटी चंदन – डॉ.अशोक आकाश 

ओकर सरी फैसला पथरा के लकीर होथे में जानथों, जेला कहिथे तेकर ले माशा भर टस…

छत्‍तीसगढ़ी व्यंग्य-‘चलव, हड़ताल करथन’

बिहनिया-बिहनिया गृहलक्ष्मी थैली म धावा बोल दिस। गृहलक्ष्मी तो अइसे होथे कि कपड़ा धोते-धोवत थैली ल…

छत्तीसगढ़ चालीसा-कन्‍हैया साहू ‘अमित’

छत्‍तीसगढ़ चालीसा छत्‍तीसगढ़ राज्‍य के गौरव गाथा आवय जेमा छत्‍तीसगढ़ के प्राकृतिक छटा,रीति-रिवाज, तीज-तिहार, देव-धामी, नहर-नदिय,…

कवि भरत ‘बुलंदी’ के छत्‍तीसगढ़ी कविता

कवि भरत 'बुलंदी' पारम्‍परिक छत्‍तीसगढ़ी गीत गणेश वंदना गीत गनपति के ले शुरु करत नंदावत हमर…

छत्‍तीसगढ़ी लोककथा: लीलागर -अंजली शर्मा

"एक झन निःसंतान दंपति रहंय। गाँव के मुखिया रहे, अन्न-धन, जमीन-जायदाद के कछु कमी नइ रहे।…

कहानी ‘पूस के रात’ के छत्‍तीसगढ़ी अनुवाद

मुंशी प्रेमचंद का सुप्रसिद्ध कहानी 'पूस की रात' का छत्‍तीसगढ़ी में अनुवाद 'पूस के रात' कन्‍हैया…