बालगीत टन-टन घंटी बाजत हे। चल-चल, स्कूल बलावत हे। पढ़ई-लिखई जिनगी हे। सार बात समझावत हे।
Category: छत्तीसगढ़ी साहित्य

छत्तीसगढ़ी साहित्य (chatisgarhi-sahitay) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ी साहित्य के प्रमुख साहित्य विधायों, लोकविधाओं पर रचनायें प्रकाशित की जा रही है । इस केटेगरी के अंतर्गत छत्तीसगढ़ी साहित्य के कहिनि, आलेख, तुकांत कविता, अतुकांत कविता, नवगीत, छंद, गजल, मुक्तक आदि के साथ ही लोक विधा जसगीत, फाग, ददरिया, करमा आदि के गीत और आलेख प्रकाशित किये जा रहे हैंं।
छत्तीसगढ़ के लोक जीवन म कबीर
छत्तीसगढ़िया मनखे के नस नस म कबीर समाय हवय कइहँव त ये बात अतिशंयोक्ति नइ होही।…
बाल गीत- नानी के घर जाबो (सार छंद)
छुट्टी होगे गरमी के अब, नानी के घर जाबो। पढ़ना-लिखना छोड़ अभी हम, नँगते मजा उड़ाबो।।
छत्तीसगढ़ी कहानी:रज्जू
मैनखे अपन उमर के अलग- अलग पड़ाव में उतार-चढ़ाव भरे जिनगी जीथे। सुख-दुख, दिन-रात, बारिश, जाड़,…
छत्तीसगढ़ी कहानी: मोर गाँव के माटी चंदन – डॉ.अशोक आकाश
ओकर सरी फैसला पथरा के लकीर होथे में जानथों, जेला कहिथे तेकर ले माशा भर टस…
छत्तीसगढ़ी व्यंग्य-‘चलव, हड़ताल करथन’
बिहनिया-बिहनिया गृहलक्ष्मी थैली म धावा बोल दिस। गृहलक्ष्मी तो अइसे होथे कि कपड़ा धोते-धोवत थैली ल…
छत्तीसगढ़ चालीसा-कन्हैया साहू ‘अमित’
छत्तीसगढ़ चालीसा छत्तीसगढ़ राज्य के गौरव गाथा आवय जेमा छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक छटा,रीति-रिवाज, तीज-तिहार, देव-धामी, नहर-नदिय,…
कवि भरत ‘बुलंदी’ के छत्तीसगढ़ी कविता
कवि भरत 'बुलंदी' पारम्परिक छत्तीसगढ़ी गीत गणेश वंदना गीत गनपति के ले शुरु करत नंदावत हमर…
छत्तीसगढ़ी लोककथा: लीलागर -अंजली शर्मा
"एक झन निःसंतान दंपति रहंय। गाँव के मुखिया रहे, अन्न-धन, जमीन-जायदाद के कछु कमी नइ रहे।…
कहानी ‘पूस के रात’ के छत्तीसगढ़ी अनुवाद
मुंशी प्रेमचंद का सुप्रसिद्ध कहानी 'पूस की रात' का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद 'पूस के रात' कन्हैया…