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ताँकाकारों की इन प्रतिनिधि रचनाओं में सामाजिक परिदृश्य के विविध रूप चित्रित हैं, तो प्रकृति के विभिन्न उपादानों की विविध भंगिमाएँ भी अनेक रूप में वर्णित हैं । श्रमसाध्य प्रयास से पूर्ण यह कार्य ताँका काव्य साहित्य के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रयोग माना गया है । संग्रह के संदर्भ में सुप्रसिद्ध हाइकु कवयित्री डाॅ. मिथिलेश दीक्षित जी कहती हैं – “प्रस्तुत संकलन का संयोजन और प्रस्तुतिकरण निश्चित ही श्रमसाध्य साहित्यिक कार्य है । भाई प्रदीप कुमार दाश जी का यह महत्वपूर्ण कार्य ताँका – साहित्य के इतिहास में अपना महत्वपूर्ण स्थान अंकित करायेगा ।”
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Description
ताँका की महक
ताँका” जापान का बहुत प्राचीन काव्य रूप है । हिन्दी के सुप्रतिष्ठित हाइकुकार प्रदीप कुमार दाश “दीपक” जी द्वारा संपादित “ताँका की महक” दो खण्डों में विभाजित है । अयन प्रकाशन नई दिल्ली से प्रकाशित इस हार्डबाउण्ड पुस्तक में देश के लगभग 271 ताँकाकारों के उत्कृष्ट ताँका संग्रहित हुए हैं । प्रथम खण्ड में पचास प्रतिष्ठित रचनाकारों के 1200 ताँका तथा द्वितीय खण्ड में 221 रचनाकारों के एक – एक प्रतिनिधि ताँका प्रस्तुत किये गये हैं । इसप्रकार इस वृहद् ताँका संकलन में 271 रचनाकारों के 1421 ताँका संग्रहित किये गये हैं । ताँकाकारों की इन प्रतिनिधि रचनाओं में सामाजिक परिदृश्य के विविध रूप चित्रित हैं, तो प्रकृति के विभिन्न उपादानों की विविध भंगिमाएँ भी अनेक रूप में वर्णित हैं । श्रमसाध्य प्रयास से पूर्ण यह कार्य ताँका काव्य साहित्य के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रयोग माना गया है । संग्रह के संदर्भ में सुप्रसिद्ध हाइकु कवयित्री डाॅ. मिथिलेश दीक्षित जी कहती हैं – “प्रस्तुत संकलन का संयोजन और प्रस्तुतिकरण निश्चित ही श्रमसाध्य साहित्यिक कार्य है । भाई प्रदीप कुमार दाश जी का यह महत्वपूर्ण कार्य ताँका – साहित्य के इतिहास में अपना महत्वपूर्ण स्थान अंकित करायेगा ।”
विवरण-
ताँका की महक : (ताँका संकलन)
संपादक : प्रदीप कुमार दाश “दीपक”
Pradeep kumar Dash “Deepak”
● Tanka Ki Mahak ( ताँका की महक )
A great collection of 271 hindi Tanka poet. [2017]
● Publisher : Ayan prakashan Delhi
● Price : ₹ 500
(पुस्तक उपलब्ध – 50 प्रति)
टीप- पुस्तक भारतीय डाके, स्पीड़ पोस्ट से भेजी जावेगी ।




